झील विकास प्राधिकरण ने झील संरक्षण नियमों के प्रारूप पर आमजन से मांगे सुझाव एवं आपत्तियां।
Date Published : 28 Jul 2026 08:55 PM

झील विकास प्राधिकरण ने झील संरक्षण नियमों के प्रारूप पर आमजन से मांगे सुझाव एवं आपत्तियां।

 

उदयपुर। विश्व प्रसिद्ध झीलों की नगरी उदयपुर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर झीलों के दीर्घकालीन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा नौकायन एवं झील संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन के उद्देश्य से जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए झीलों में नौकायन, जेट्टी एवं झील संसाधन प्रबंधन संबंधी प्रस्तावित नियमों पर आमजन, पर्यावरणविदों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों, नौकायन व्यवसायियों तथा विभिन्न संस्थाओं से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इच्छुक नागरिक इस सार्वजनिक सूचना के प्रकाशन की तिथि से 15 दिवस के भीतर अपने सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकेंगे, जिनका परीक्षण कर आवश्यकतानुसार अंतिम नियमों में समावेश किया जाएगा।
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि हाल ही में जिला कलक्टर एवं जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति के अध्यक्ष गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में झील संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में पर्यटन विभाग, जल संसाधन विभाग, मत्स्य विभाग, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, परिवहन विभाग, उदयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य झीलों के संरक्षण एवं विकास के लिए ऐसी नीति तैयार करना था जो वर्तमान आवश्यकताओं के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सके।


झील संरक्षण को लेकर व्यापक नीति तैयार।
बैठक में झीलों में संचालित नौकाओं के संचालन, जेट्टी प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा मानकों तथा झीलों की वहन क्षमता के अनुरूप नौकायन गतिविधियों के नियमन पर विशेष चर्चा की गई। प्रस्तावित नियमों में झीलों की क्षमता के आधार पर नौकायन गतिविधियों का विनियमन, पैसेंजर कैपेसिटी यूनिट का निर्धारण, नौकाओं के संचालन की अनुमति प्रक्रिया, जेट्टी संचालन की व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण के मानक, सुरक्षा प्रावधान तथा झील संसाधनों के संतुलित एवं न्यायसंगत उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि समिति का उद्देश्य केवल वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नियम बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी प्रभावी एवं व्यवहारिक नीति तैयार करना है जो आने वाले वर्षों में भी झीलों के संरक्षण, पर्यटन गतिविधियों तथा स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो। यही कारण है कि ड्राफ्ट नीति को अंतिम रूप देने से पूर्व इसे सार्वजनिक कर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।

विशेषज्ञों एवं आमजन के सुझाव किए आमंत्रित, मिलेगा महत्व।
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित ड्राफ्ट नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा जिससे झील संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधि, नौकायन व्यवसायी, सामाजिक संगठन तथा आम नागरिक अपने सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकें। समिति का मानना है कि जनसहभागिता से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार नीति अधिक प्रभावी, व्यावहारिक एवं पारदर्शी होगी। सभी प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का सक्षम स्तर पर परीक्षण कर आवश्यकतानुसार अंतिम ड्राफ्ट में सम्मिलित किया जाएगा।

नौकायन संचालन एवं अनुबंध नवीनीकरण पर भी हुई चर्चा।
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार बैठक के दौरान पिछोला झील सहित अन्य झीलों में संचालित नौकाओं के संचालन एवं अनुबंध नवीनीकरण के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई। जिला कलक्टर ने झीलों में संचालित नौकाओं की संख्या, उनके संचालन के आधार तथा झीलों की वास्तविक क्षमता से संबंधित समस्त जानकारी आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही जल संसाधन विभाग को झीलों में सुरक्षित रूप से संचालित की जा सकने वाली नौकाओं की संख्या तथा इस संबंध में पूर्व में जारी आदेशों एवं दिशा-निर्देशों का समग्र अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

नई नीति लागू होने तक वर्तमान व्यवस्था रहेगी यथावत।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि नई नीति वर्तमान में ड्राफ्ट अवस्था में है ऐसी स्थिति में राजस्व हितों को प्रभावित होने से बचाने के लिए समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि नई नीति प्रभावी होने अथवा संबंधित प्रकरणों के अंतिम निर्णय तक वर्तमान नियमों के अनुसार आवश्यक वृद्धि के साथ अनुबंधों के नवीनीकरण की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी, ताकि प्रशासनिक कार्य एवं राजस्व संग्रहण प्रभावित न हो।

झील संरक्षण के लिए दीर्घकालीन दृष्टिकोण।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि प्रस्तावित नियमों को केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रखते हुए भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों, पर्यटन के बढ़ते दबाव, झीलों की संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उदयपुर की झीलें केवल पर्यटन का माध्यम नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान, पर्यावरणीय विरासत एवं जल संरक्षण की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए इनके संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं उत्तरदायी व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।

आयुक्त ने की आमजन से सुझाव भेजने की अपील।
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने शहरवासियों, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों, पर्यटन एवं नौकायन क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा अन्य इच्छुक व्यक्तियों से अपील की है कि वे निर्धारित 15 दिवस की अवधि के भीतर अपने सुझाव एवं आपत्तियां लिखित रूप में जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति, उप आयुक्त कक्ष, कमरा संख्या-18, नगर निगम उदयपुर, टाउनहॉल लिंक रोड, उदयपुर अथवा commudr@gmail.com पर प्रेषित करें। निर्धारित अवधि के पश्चात प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रस्तावित ड्राफ्ट नियमों का अवलोकन कार्यालय समय में नगर निगम कार्यालय में किया जा सकता है तथा इन्हें udaipurmc.org, uda.rajasthan.gov.in एवं udaipur.rajasthan.gov.in वेबसाइटों से भी डाउनलोड किया जा सकता है। निगम आयुक्त ने विश्वास व्यक्त किया कि उदयपुर की झीलों के संरक्षण एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए तैयार की जा रही यह नई नीति जनसहभागिता के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनेगी तथा आने वाले समय में झीलों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं सतत पर्यटन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

राजस्थान झील विकास प्राधिकरण करेगा अंतिम निर्णय।
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि आगामी 15 दिनों में प्राप्त होने वाले महत्वपूर्ण सुझावों एवं आपत्तियों का चयन कर उन्हें ड्राफ्ट में सम्मिलित करते हुए संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद यह संशोधित ड्राफ्ट राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के अंतर्गत राजस्थान झील विकास प्राधिकरण को अनुमोदन एवं अंतिम निर्णय हेतु भेजा जाएगा। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि झील संरक्षण के लिए तैयार किए गए इस ड्राफ्ट पर अंतिम निर्णय राजस्थान झील विकास प्राधिकरण द्वारा ही लिया जाएगा।

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